[ Up | Sentences | Dhaatus | Vibhakti | Misc | Site Index | Learn Sanskrit | Home Personal | Home ]


लघुसिद्धान्तकौमुदयः तृतीयः पाठः (Third Lession Laghu Siddhanta Kaumudi)

२००७-०६-२३ शनिवासरः (2007-06-23 Saturday)

अद्य रात्रौ अस्माकं तृतीयः पाठः आसीत्। वयं अधोलिखितानि सूत्राणि अपठम -

४२ अकः सवर्णे दीर्घः ६।१।१०१। दैत्यारिः। श्रीशः। विष्णुदयः। होतृकारः।

४३ एङः पदान्तादति ६।१।१०९। हरेऽव। विष्णोऽव।

४४ सर्वत्र विभाषा गोः ६।१।१२२।  गो‍अग्रम् गोऽग्रं वा।

४५ अनेकाल् शित् सर्वस्य १।१।५५।

४६ ङिच्च १।१।५३।

४७ अवङ् स्फोटायनस्य ६।१।१२३। गवाग्रम्। गोऽग्रम्।

४८ इन्द्रे च ६।१।१२४ गवेन्द्रः।

४९ दूराधूते च ८।२।८४।

५० प्लुत-प्रगृह्या अचि नित्यम् ६।१।१२५। आगच्छ कृष्ण ३ अत्र गौश्चरति।

५१ ईदूदेद् द्विवचनं प्रगृह्यम् १।१।११। हरी एतौ। विष्णू इमौ। गङ्गे अमू।

५२ अदसो मात् १।१।१२। अमी ईशाः।


[ Up | Sentences | Dhaatus | Vibhakti | Misc | Site Index | Learn Sanskrit | Home Personal | Home ]