[ Up | Sentences | Dhaatus | Vibhakti | Misc | Site Index | Learn Sanskrit | Home Personal | Home ]
त्रयोदशोऽध्यायः (Thirteenth Chapter)
२००७-०३-२९ गुरुवासरः (2007-03-29 Thursday)
अद्य अहं पुनः गीतायाः क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयो नाम त्रयोदशस्य अध्यायस्य अनुशीलनम् आरब्धवान्। अहं कल्पनाम् न कर्तुं शक्नोमि एकमासस्य अवध्यां कियत् विस्मरिष्यामि। अनुशीलनम् सर्वथा अनीवार्यम्।
[ Up | Sentences | Dhaatus | Vibhakti | Misc | Site Index | Learn Sanskrit | Home Personal | Home ]